कौन हो तुम?

क्या है तू, समझ ना आई अब तक


एक अबला नारी या अटूटऔरत

खुश है तू अपनी जिंदगानी से


फिर क्यों आंसू बहाती है एकांत में बैठकर

खुश है तू अपनों का साथ पाकर


फिर क्यों दिल भर आता है एकांत में बैठकर

खुश है तू पढ़ी लिखी बहू बनकर


फिर क्यों कहलाती है नासमझ,गंवार

खुश है तू हर रिश्ते में ढल जाना


फिर क्यों कहलाती है पराये घर की

आयी समझ बस इतनी सी


है तू स्वर्ण पिंजरे के पंछी की तरह

पास है तेरे प्रत्येक सुख समृद्धि


पर आजादी नहीं उड़ान भरने की

✍️Kirtisofatbharti

क्या तारीफ़ करूं चांद की🌛🌛

क्या तारीफ़ करूं चांद की…..
कभी ईद का चांद, कभी करवा चौथ का चांद
है यह बच्चों का चंदा मामा

क्या तारीफ़ करु चांद की…..
कभी रोहनी प्रीतम, कभी गजानंद का उपहास करे
है यह शिव शीश का ताज

क्या तारीफ करूं चांद की….
कभी सुनामी लहरें, कभी ज्वार भाटा लाए समुंदर में
हैं धरा पर ग्रहण का कारण

क्या तारीफ करूं चांद की…..
कभी सुहागिनों का प्रेमी कभी हुसन का तुल्य बने
है यह सच्चा तन्हाई का साथी

क्या तारीफ करूं चांद की….
कभी लोरी बनें बच्चों की, कभी गीतकार के गीत
है  शायरी बिन इसके अधूरी

क्या तारीफ करूं चांद की….
कभी भाद्र चतुर्थी का कलंक, कभी शरद पूर्णिमा का रोगनाशक है धरा का एकलौता उपग्रह

क्या तारीफ करूं चांद की…….
कभी दे शीतलता , कभी बने हमदर्द मेरा
है तू वही जो आया डोली में साथ मेरे

क्या तारीफ करूं चांद की….
कभी देखूं मां का रूप, कभी सच्चा दोस्त
है तू साक्षी मेरे दुःख सुख का

क्या तारीफ करूं चांद की…..

पूछना है आज सबसे

पूछना है आज सबसे है क्या कलंक बिन मां बाप की बेटी होना

क्या हुआ यदि नहीं है मां बाप , पास है मेरे बाकी सब परिवार। पूछना है आज…….

क्या कमी है मुझमें, जो हर पल याद दिलाया जाता है अनाथ शब्द को । पूछना है आज……

कसूर मेरा क्या है ,जो नजरें झुका कर चुपचाप चलना सिखुं। पूछना है आज….

गलती मेरी क्या है ,होता देख भेदभाव चुप रहकर सहना सिखुं। पूछना है आज….

बन गई हूं मां ,पर तर्क बिन मां बाप की बेटी का हुआ नहीं खत्म । पूछना है आज….

लक्ष्य नहीं है मेरा, ठेस पहुंचाना किसी अपने के दिल को ।

पूछना है आज सबसे है क्या कलंक बिन मां बाप की बेटी होना

करोना काल में रक्षाबंधन

आ गया त्यौहार रक्षाबंधन का हर बार की तरह,
सजेगी कलाई भाई की हर बार की तरह,
पर नोकझोक शगुन की ना होगी हर बार की तरह।

प्रेम और स्नेह होगा भाई बहन का हर बार की तरह,
वादे और वचन निभाये जाएगे हर बार की तरह,
नजदीकियां ना होगी आपस में हर बार की तरह।

रहना है दूर जिम्मेदारी के साथ इस बार,
मनायेंगे राखी दिलों की तार जोड़ कर इस बार,
क्योंकि करोना का रूप है भयानक इस बार।

रक्षाबंधन की बधाई